"Set justice aside them and what are kìngdoms but fair thievish purchases."
ऑगस्टाइन परिवार, लौकिक राज्य और ईश्वरीय राज्य के सन्दर्भ में न्याय की विवेचना करते हैं। व्यक्ति द्वारा ईश्वरीय राज्य के प्रति कर्त्तव्य पालन को ही वह न्याय मानते हैं।
मध्यकाल में ही थॉमस एक्विनास कानून व न्याय को परस्पर सम्बन्धित मानते हुए न्याय की निम्नलिखित परिभाषाव्यक्त करते हैं
"न्याय एक व्यवस्थित और अनुशासित जीवन व्यतीत करने तथा उन कर्त्तव्यों का पालन करने में निहित हैं, जिनकी व्यवस्था मांग करती है।"
थॉमस एक्विनास समानता को न्याय का मौलिक तत्व
मानते हैं।
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